मध्य प्रदेश में रेल यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल, क्राइम के मामले में देश में दूसरे नंबर पर राज्य

मध्य प्रदेश में रेल यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल, क्राइम के मामले में देश में दूसरे नंबर पर राज्य

भोपाल | मध्य प्रदेश में रेल सफर करने वाले यात्रियों के लिए चिंताजनक खबर है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, ट्रेनों में होने वाले अपराधों के मामले में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष दो राज्यों में शामिल हो गया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले तीन वर्षों (2022-2024) के दौरान प्रदेश में रेल अपराधों में 70 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। जहां एक ओर इटारसी जैसे बड़े रेल मंडल और भोपाल जैसे वीआईपी स्टेशनों से सैकड़ों ट्रेनें गुजरती हैं, वहीं यात्रियों की सुरक्षा अब एक बड़ी चुनौती बन गई है।

अपराध के आंकड़ों में एमपी देश में दूसरे स्थान पर

एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन सालों में देशभर के जीआरपी (GRP) थानों में कुल 83,699 मामले दर्ज किए गए। इनमें से अकेले मध्य प्रदेश में 12,931 आपराधिक घटनाएं सामने आईं, जो देश के कुल रेल अपराधों का लगभग 15.4 प्रतिशत है। आंकड़ों के इस जाल में महाराष्ट्र 15,699 मामलों के साथ पहले पायदान पर है, जिसके ठीक बाद मध्य प्रदेश का नंबर आता है। इसके बाद गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का स्थान है।

92 प्रतिशत मामलों में यात्रियों का सामान हुआ चोरी

ट्रेनों में होने वाले अपराधों के स्वरूप का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि मध्य प्रदेश में सबसे बड़ी समस्या चोरी की है। दर्ज किए गए 12,931 मामलों में से 92 प्रतिशत से अधिक घटनाएं चोरी की हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश में औसतन हर दिन 32 रेल यात्री चोरी की वारदातों का शिकार हो रहे हैं। राज्य से रोजाना गुजरने वाली लगभग 700 यात्री ट्रेनों और 900 मालगाड़ियों के बीच सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी यात्रियों के लिए डर का कारण बन रही है।

प्रमुख स्टेशनों और रेल मंडलों पर बढ़ता दबाव

मध्य प्रदेश रेल नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहाँ इटारसी सबसे बड़े रेल जंक्शन के रूप में कार्य करता है और राजधानी भोपाल से कई प्रीमियम व वीआईपी ट्रेनें संचालित होती हैं। भारी रेल यातायात और यात्रियों की संख्या के कारण अपराधी इन क्षेत्रों को निशाना बना रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में अपराध दर में आई 70 प्रतिशत की उछाल यह संकेत देती है कि रेल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अपनी निगरानी और गश्त बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है ताकि यात्रियों का सफर सुरक्षित हो सके।

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