“समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश” के लक्ष्य को किया जा रहा है साकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्ष-2026 प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश में विविध जलवायु जोन, पर्याप्त सिंचाई सुविधा, बेहतर रोड नेटवर्क उपलब्ध है। इसका लाभ लेकर किसानों की आय में वृद्धि और कृषि क्षेत्र में रोजगार सृजन के उद्देश्य आधारित गतिविधियां संचालित कर प्रदेश में "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में किसान कल्याण के लिए पर्याप्त बजट की व्यवस्था की गई है, जिससे किसानों को आत्म-निर्भर बनाने एवं कृषि आय को दोगुना करने में मदद मिलेगी। कृषि एवं किसानों से संबंधित योजनाओं में भी बजट की कोई कमी नहीं रखी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट से किसान कल्याण के कार्यों को गति प्रदान की जाएगी। इससे किसान कल्याण वर्ष के निर्धारित लक्ष्यों को भी प्राप्त किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के बजट 2026-27 के अंतर्गत कृषि के साथ जल प्रदाय योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किये गये। जल परियोजनाओं के माध्यम से हर किसान के खेत तक सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराया जायेगा। प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से सिंचाई के रकबे में निरंतर बढोत्तरी हो रही है। शीघ्र ही प्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर हो जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आगामी वित्तीय वर्ष में किसान कल्याण के लिये जो प्रावधान किये गये हैं, उसमें मुख्य रूप से प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में 343 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री जन मन कार्यक्रम अंतर्गत विद्युतीकरण कार्य के अन्तर्गत 96 करोड़ रुपये, अटल कृषि ज्योति योजना के अन्तर्गत 13914 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अन्तर्गत 5501 करोड़ रुपये, भावांतर/फ्लेट रेट योजना के अन्तर्गत 600 करोड़ रुपये, समर्थन मूल्य पर किसानों से फसल उपार्जन पर बोनस का भुगतान के अन्तर्गत 150 करोड़ रुपये और परंपरागत कृषि विकास योजना में 53 करोड़ रूपये का प्रावधान रखा गया है।
बजट में म.प्र.विद्युत मंडल द्वारा 5 एच.पी. के कृषि पम्पों/थ्रेशरों और एक बत्ती कनेक्शन को निःशुल्क विद्युत प्रदाय हेतु प्रतिपूर्ति के अन्तर्गत 5276 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 1299 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता योजना के अन्तर्गत 1000 करोड़ रुपये, अधीनस्थ तथा विशेषज्ञ कर्मचारी वृन्द (जिला एवं अधीनस्थ स्तर का अमला) में 525 करोड़ रुपये, पर ड्रॉप मोर क्रॉप में 450 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना-2024 के अन्तर्गत 385 करोड़ रुपये, दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन (60:40 प्रतिशत शेयरिंग पैटर्न) के अन्तर्गत 335 करोड़ रुपये, नेशनल मिशन ऑन ईडीबल ऑइल एण्ड ऑइलसीड के अन्तर्गत 266 करोड़ रुपये, सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकेनाईजेशन (एस.एम.ए.एम.) के अन्तर्गत 243 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 226 करोड़ रुपये, फूड एण्ड न्यूट्रीशन सिक्योरिटी में 150 करोड़ रुपये, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अन्तर्गत 142 करोड़ रुपये, सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (आत्मा) के अन्तर्गत 126 करोड़ रुपये, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर को ब्लॉक ग्रांट के अन्तर्गत 100 करोड़ रुपये, दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन (100 प्रतिशत केन्द्रांश) के अन्तर्गत 100 करोड़ रुपये, कृषि क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता अनुसंधान के अन्तर्गत 100 करोड़ रुपये, सहायक भूमि संरक्षण कार्यालय के अमले की स्थापना के लिये 59 करोड़ रुपये, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्व विद्यालय ग्वालियर को ब्लाक ग्रांट के अंतर्गत 58 करोड़ रूपये और जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय की स्ववित्तीय योजना में 57 करोड़ रूपये का प्रावधान रखा गया है।
वर्षभर चलेंगी किसान कल्याण गतिविधियां
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष-2026 में किसान कल्याण संबंधी गतिविधियों का वार्षिक कैलेंडर के अनुसार संचालन प्रारंभ किया जा चुका है। इसमें किसान सम्मेलन, जन-जागरूकता की गतिविधियां, कृषि रथ के माध्यम से किसानों तक शासन की योजनाओं की जानकारी, कृषि संबंधी सलाह, किसानों की समस्याओं का निराकरण सहित कृषि योजनाओं को किसानों के खेत तक पहुंचाने के लिए मैदानी अमला लगातार कार्य कर रहा है। किसानों की आय में वृद्धि और रोजगार सृजन के लिए कृषि यंत्रीकरण, कृषकों के क्षमता विकास के लिए प्रशिक्षण और भ्रमण कार्यक्रम, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, उद्यानिकी विस्तार, एफपीओ निर्माण आधारित गतिविधियों को प्रमुखता दी जा रही है। इसके साथ ही सस्ती ब्याज दरों पर ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए माइक्रो इरीगेशन, बेहतर बाजार नेटवर्क, किसानों को उनके उत्पाद का वाजिब मूल्य दिलवाने, पशुपालन तथा मछली पालन जैसी गतिविधियों के लिए कृषकों को प्रेरित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु के अनुकूल कृषि प्रबंधन, सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, श्रीअन्न उत्पादन के प्रोत्साहन और जैव विविधता तथा परम्परागत कृषि ज्ञान के संरक्षण और प्राकृतिक और जैविक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गये हैं।
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