महाकाल के आंगन से होगी बसंत की शुरुआत, पीले फूल के साथ हर्बल गुलाल होगा अर्पित
उज्जैन: महाकालेश्वर धाम से हिंदुओं के त्योहार की शुरुआत की पुरानी परंपरा है. बसंत पंचमी के दिन भी अल सुबह 4 बजे से होने वाली भस्म आरती के दौरान भगवान को हर्बल गुलाल, पीले वस्त्र, पीले फूल अर्पित कर विशेष पूजन अर्जन किया जाएगा. साथ ही भगवान का केसर युक्त पंचामृत से अभिषेक भी किया जाएगा.
सांदीपनि आश्रम में होगा विद्या आरंभ संस्कार
मंदिर की परंपरा अनुसार वसंत पंचमी से होली तक आरती में भगवान को हर्बल गुलाल अर्पित होगा. वहीं, उज्जैन के सांदीपनि आश्रम, जहां भगवान श्री कृष्ण ने शिक्षा प्राप्त की, उस स्थल पर खास आयोजन होना है. यहां बच्चे पेन और स्लेट लेकर आश्रम पहुचेंगे, जहां बच्चों का विद्या आरंभ संस्कार होगा. इसके साथ ही उज्जैन में ही 300 वर्ष पुरानी मां सरस्वती की प्रतिमा है (स्याही देवी) जिसका पूजन करने बड़ी संख्या में छात्र आते हैं.
भगवान को हर्बल गुलाल होगा अर्पित
मंदिर के पुजारी आशीष ने कहा, "अल सुबह भस्म आरती के दौरान बसंत उत्सव मनाया जाता है. बाबा को बसंत फूल चढ़ाया जाएगा. वहीं, देर शाम संध्या आरती के समय बाबा महाकाल, नंदी महाराज को सुबह चढ़ाये गये बसंत के फूल से गुलाल बनाकर लगाया जाएगा. जिसके बाद श्रद्धालुओं पर भी वही हर्बल गुलाल उड़ाया जाएगा. हर साल इसी तरह ही बसंत उत्सव की शुरुआत सनातन धर्म में की जाती है. बसंत उत्सव खास कर हरियाली आने को लेकर मनाया जाता है. इसे वृंदावन में फाग उत्सव के रूप में जाना जाता है."
'बसंत में बदलती है प्रकृति व्यवस्था'
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी महेश गुरु ने कहा, "ये बसंत उत्सव है, जिसमें प्रकृति की सारी व्यवस्थाएं बदलती है. इस दिन भगवान को विशेष कर पीले वस्त्र और भोग अर्पित किए जाते हैं. इस दिन नई फसल सरसों की उम्बी से भगवान के धाम को सुसज्जित किया जाता है. भगवान महाकाल की पांचों आरती में बसंत के इस खास पर्व पर विशेष पूजन अभिषेक का क्रम जारी रहता है."
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